राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संपन्न हुआ प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन  ।

बाराँ – विश्व को परिवार व्यवस्था भारत ने दी है। हमारी परिवार व्यवस्था महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान इकाई है यह हमारे देश का विशिष्ट है।संपूर्ण विश्व को परिवार व्यवस्था के अनुरूप जीवन जीना भारत ने सिखाया है। ज्ञान का आधार वैदिक काल से ही हमारा परिवार रहा है।परिवार के माध्यम से ही पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय संस्कारों को हम हस्तांतरित करते आ रहे हैं।यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में मंगलवार रात्रि को श्री गुरु नानक जयंती के अवसर पर संस्था धर्मादा धर्मशाला के सभागार में आयोजित प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन में अखिल भारतीय ग्राम विकास प्रमुख डॉ.दिनेश कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि प्रकट किए उन्होंने कहा कि हमारी पहली पाठशाला हमारा घर है।मां सबसे बड़ी व प्रथम गुरु है तथा हमारी रसोई एक श्रेष्ठ औषधालय हैं।हमें सनातन संस्कृति के अनुरूप राष्ट्रीयता के भाव के साथ व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के कार्य करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक राधेश्याम गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।समारोह की मुख्य अतिथि डॉ.उषा अग्रवाल सेवानिवृत्त वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ रही तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक रमेश चंद्र मेहता ने की कार्यक्रम में 315 पुरुष तथा 112 मातृशक्ति ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।इस अवसर पर सामाजिक समरसता का संदेश देने वाली एक मंदिर,एक कुआं और एक श्मशान की रंगोली सजाई गई जो प्रबुद्ध नागरिकों के लिए आकर्षक का केंद्र रही।राष्ट्रीय संघ के प्रचार विभाग की ओर से राष्ट्रीय सद साहित्य बिक्री स्टाल भी लगाई गई।आभार एवं समरसता मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।