कानपुर में नई सड़क पर हुए बवाल मामले में जेल भेज गया बिल्डर वसी अरबी भाषा का जानकार है। वह 90 के दशक में कई बार सउदी अरब गया था। वहां से मदरसे के नाम पर चंदा एकत्रित किया इसके बाद उस रकम से खुद को शहर का एक बड़ा बिल्डर के रुप में खड़ा कर लिया। सूत्रों के अनुसार 55 साल का वसी 90 के दशक में एक साधारण व्यक्ति था। वह अपने भाई आजाद के साथ सिलाई से जुड़े छोटे-मोटे उपकरण भी बनाता था। इस बीच वह  तब्लीगी जमात के संपर्क में आ गया। कई बार अपने एक होटल संचालक दोस्त के साथ सऊदी अरब गया। ये लोग अक्सर शब-ए-बरात के आसपास खाड़ी देशों में जाते थे और ईद तक वहीं रहते थे। कानपुर में एक बड़े होटल का मालिक वसी का दोस्त वहां रमजान के महीने में मिलने वाली जकात बटोरता था, जबकि अरबी भाषा का जानकार वसी मदरसे में धार्मिक शिक्षा देने के नाम पर अमीर अरबी लोगों से चंदा वसूलता था। इसके बाद उस रकम से शहर में  बिल्डिंगें बनाकर बेचनी शुरू कर दिया था सऊदी से ऐसे मंगाता था रुपये 
वसी काफी शातिर है। वह शुरुआती तौर पर मिले चंदे से वसी ने कानपुर में कुछ बिल्डिंगें बनवाईं। बिल्डिंग के पार्किंग एरिया में हफ्ते में एक दिन बच्चों को लाकर पढ़ाया जाता था। इसका विडियो बनाकर खाड़ी देशों में भेजा जाता था। बच्चों की तालीम और खाने-पीने के लिए हर महीने के हिसाब से रुपये आते रहे और वसी बिल्डिंगों का कारोबार बढ़ाता गया। 

वसी की राह बदलते देख भाई आजाद उससे अलग हो गया। धीरे धीरे उसे बिल्डिंगों को खाली कराने और बनवाने के बड़े ठेके मिलने लगे थे। इसबीच वसी के संपंर्क में बड़े अपराधी आ गए। जिनकी मदद से वसी विवादित संपत्तियों को खाली कराने और बनवाने लगा। 

बुर्का पहन पुलिस के सामने भागा था वसी 

25 जून के आसपास वसी अपने बेटे आरिफ के साथ बाइक से कानपुर के बाहर चला गया था। वसी ने भागते समय बुर्का पहन रखा था। उसके घर से कुछ ही दूरी पर दो सिपाही भी खड़े थे, लेकिन गिरफ्तारी का आदेश न होने के कारण वह कुछ नहीं कर सके। 

बीते 10 दिनों के दौरान वसी दिल्ली में था और इधर-उधर घूम रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें काम कर रही थीं। वसी के बेटे अब्दुल रहमान को दो दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया गया। जल्द पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी