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विप्रो ने 400 से अधिक फ्रेशर्स कर्मचारियों को कंपनी से निकाल दिया है। इसी के साथ ट्रेनिंग पर किए जाने वाले खर्च (75000) की रक़म की भी मांग की है। जिसे बाद में विप्रो ने माफ कर दिया है।

पिछले कई दिनों से एक भी दिन ऐसा नहीं जा रहा है, जिसमें बड़ी-बड़ी कंपनियों की ओर से छंटनी ना की जा रही हो। इसी बीच विप्रो ने भी अपनी कंपनी के 400 से अधिक फ्रेशर्स कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का फैसला लिया है। विप्रो ने बताया कि यह फैसला फ्रेशर्स कर्मचारियों के खराब प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है। सभी कर्मचारियों को बर्खास्त होने की सूचना दे दी गई है। विप्रो ने ट्रेनिंग के दौरान हर कर्मचारी पर 75 हजार रुपये खर्च किए थे, जिसको विप्रो ने निकाले जाने वाल कर्मचारियों से वापस मांगा है। लेकिन अब विप्रो ने ट्रेनिंग कॉस्ट (75000) को माफ कर किया है।

आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईटी जायंट विप्रो ने 452 फ्रेशर्स को नौकरी से निकाल दिया है। ट्रेनिंग देने के बाद भी कर्मचारियों का प्रदर्शन आंतरिक मूल्यांकन परीक्षणों ( internal assessment tests) में खराब था। सभी छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को टर्मिनेशन लेटर जारी कर दिया गया है। विप्रो कि ओर से फ्रेशर्स को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि “पर्याप्त प्रशिक्षण के बावजूद, वे अच्छा प्रदर्शन करने में विफल रहे हैं”। आईएएनएस के करीबी सूत्रों ने यह भी बताया कि फ्रेशर्स को भेजे गए टर्मिनेशन लेट में कहा गया था कि कंपनी द्वारा उन्हें ट्रेनिंग देने पर खर्च की 75000 रुपये की रक़म भी वापस करें। हालांकि कंपनी ने बाद में यह रक़म माफ कर दी।