लोकेशन छबडा

रिपोर्टर माजिद राही

अन्धा बांटे रेवड़ी अपने अपने को देय वाली कहावत इस बार छबड़ा के स्वाधीनता दिवस समारोह मे सम्मानित होने वालों के नाम पर नजर डालें तो पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है जिसके तहत चयन समिति के सदस्यों ने अपने अपने चाहतों का चयन करा कर उनका सम्मान तो कराया ही साथ ही विभागीय अधिकारियों ने भी अपने-अपने चहते कर्मचारियों का नाम भेज कर उनका सम्मान करा दिया जबकि यह कर्मचारी पहले भी सम्मानित हो चुके हैं कोरोना काल के दौरान जिन लोगों की भागीदारी लगभग नगण्य थी उनको तो सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया लेकिन जिन लोगों ने कोरोना काल में तन मन धन लगाकर अपने हाथों से खाना बनाकर तथा जान जोखिम में डालकर घर-घर गरीबों को खाना खिलाया इनमें से किसी का भी नाम सम्मान समारोह की लिस्ट में नहीं आया जो एक तरह से उनके द्वारा ऐसे संकट में समय में मानवता की की गई सेवा का अपमान है इसका एक पार्षद ने तो हाथों हाथ स्वाधीनता समारोह में ही जमकर विरोध कर दिया जिस पर आनन-फानन में उक्त लोगों का भी नाम लिखा गया लेकिन अपने अपमान से आहत इन लोगों ने समारोह के बाद सम्मान लेने से इनकार कर दिया साथ ही उन हरिजन कर्मचारियों का भी सम्मान नहीं किया गया जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार में अपनी अहम भागीदारी निभाई कोरोना के चलते जिन लोगों को सम्मानित किया गया है वह तीनों एक ही दल विशेष के हैं जिन्होंने कोरोना का लिए क्या सेवा की यह छबड़ा के लोगों को भी पता नहीं है आम जनता का कहना है ऐसे सम्मानित करने से यह सम्मानित करने की परंपरा ही खत्म कर दी जाए तो ठीक है या चयन समिति में निष्पक्ष लोगों का चयन किया जाए जो वास्तविक लोगों को सम्मानित करा सके।