• मिर्जापुर सोरसन के बीच सुंदर वाले हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा के दौरान छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। मैं गोवर्धन को जाऊं मेरे मैं तो ना माने मेरे मनवा भजन पर श्रद्धालु झूम के नाचे। शनिवार को कथा वाचक पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने कहा कि जीवन में कभी अभिमानी मत बनो भक्त बन कर भजन करके अभिमान का जीवन जिओगे तो आत्मा परमात्मा का मिलन नहीं होगा भक्ति से जीवन में शीतलता प्राप्त होती। इंद्र को अपनी शक्तियों पर अभिमान हो गया था। उस अभिमान को नष्ट करने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को अपनी अंगुली उठाकर गोवर्धन धारण कर इंद्र के अभिमान को दूर किया। भागवत कथा के दौरान शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कल्पवृक्ष की तरह है, जिस की छांव में बैठने से जीव को परम शांति प्राप्त होती है। ना जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं भजन पर श्रोताओं ने मंत्र मुक्त होकर नृत्य किया। श्यामसुंदर मीणा ने भागवत कथा का पूजन किया। कुंजबिहारी राठौड़ मिर्जापुर, कन्हैया लाल सुमन, मदन गोपाल पारेता, महावीर मीणा ने आरती उतारी।