Spread the love

छबड़ा. जमीन के असली मालिक की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जमीन हड़पने की नीयत से फर्जी विक्रय पत्र तैयार कराने पर आरोपी छबड़ा निवासी प्रदीप अग्रवाल, रामकिशन लोधी को कोर्ट ने दोषी माना है। इसके बाद रविवार को उन्हें सात-सात साल की सजा से दंडित किया। इस मामले की सुनवाई गुना में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश कविता वर्मा की अदालत में हुई।

 

ये है मामला

 

गुना जिले की बमोरी तहसील के डोबरा गांव के कृषक गजानंद किरार पुत्र बिरधीलाल किरार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के पिता राजेंद्र सिंह सिसोदिया से 1984 में सर्वे क्रमांक 57 की भूमि खरीदी थी। इस जमीन को हड़पने के लिए छबड़ा निवासी प्रदीप अग्रवाल पुत्र नाथूलाल अग्रवाल जो यहां पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी का संचालक है, ने किसी अन्य व्यक्ति को गजानंद किरार के स्थान पर गजानंद बनाकर कार्यालय सब रजिस्ट्रार में फर्जी रूप से विक्रय

 

पत्र उक्त भूमि का बनवा लिया। इसमें रामकिशन लोधी पूर्व सरपंच इस विक्रय पत्र का गवाह बना था। कोर्ट पहुंचा मामला

 

फर्जी रजिस्ट्री कराने के मामले को लेकर कृषक फरियादी गजानंद किरार ने अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव के माध्यम से प्रकरण प्रदीप अग्रवाल के विपरीत प्रस्तुत किया था। इस पर से थाना कैंट में 2013 में तत्कालीन जेएमएफसी आरके जैन के आदेश पर से दर्ज की गई थी।

 

ऊपरी अदालत ने निर्णय को सही माना

 

कैंट थाना पुलिस ने चालान पेश किया था, जिस पर न्यायालय सन 2017 से लंबी लड़ाई के बाद आरोपी प्रदीप अग्रवाल एवं रामकिशन लोधी को 7 साल साल की सजा सुनाई थी। सजा के इस आदेश के विरुद्ध आरोपियों ने ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी। इसमें निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश को सही माना और इन दोनों आरोपियों को गुना जेल भेज दिया। लगभग 4 वर्ष पूर्व प्रदीप अग्रवाल के पक्ष में संपादित फर्जी एवं कूट रचित विक्रय पत्र को निरस्त घोषित कर दिए जाने के आदेश को भी सही माना था।